कैसा चक्कर चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने | Kaisa Chakkar Chalaya re Shyam Teri Ungali Ne Lyrics | Krishna Bhajan Lyrics

भक्ति संगीत के क्षेत्र में, कृष्ण भजनों की मनमोहक धुन पीढ़ियों से दिलों को लुभाती रही है। इनमें से “कैसा चक्कर चलाय रे श्याम तेरी उंगली ने” एक मंत्रमुग्ध और मनमोहक रचना के रूप में सामने आती है। यह लेख गीत के सार पर प्रकाश डालता है, इसके शब्दों के पीछे के गहरे अर्थों और इससे उत्पन्न होने वाली भावनाओं की खोज करता है।

bhakti sangiit ke kshetr men, kṛshṇ bhajanon kii manamohak dhun piidhiyon se dilon ko lubhaatii rahii hai. inamen se “kaisaa chakkar chalaay re shyaam terii ungalii ne” ek mantramugdh owr manamohak rachanaa ke ruup men saamane aatii hai. yah lekh giit ke saar par prakaash ḍaalataa hai, isake shabdon ke piichhe ke gahare arthon owr isase utpann hone vaalii bhaavanaaon kii khoj karataa hai.

Bhajan NameKaisa Chakkar Chalaya re Shyam Teri Ungali Ne Lyrics
SingerTripti Shakya
LyricsMandip Kumar

कैसा चक्कर चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने

कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने
उंगली ने तेरी उंगली ने तेरी
कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने

जब द्रोपदी दुष्टों ने घेरी
कैसा चिर बढाया रे श्याम तेरी ऊँगली ने
कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने

जहर का प्याला राणाजी ने भेजा
कैसा अमृत बनाया रे श्याम तेरी ऊँगली ने
कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने

जब प्रह्लाद पहाड़ से गिरा था
कैसा कमल खिलाया रे श्याम तेरी ऊँगली ने
कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने

जब नरसी ने तुमको टेरा
कैसा भात भराया रे श्याम तेरी ऊँगली ने
कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने

जब अर्जुन ने जैद्रात को मारा
कैसा सूरज छिपाया रे श्याम तेरी उंगली ने
कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने

kaisaa chakr chalaayaa re shyaam terii ungalii ne
ungalii ne terii ungalii ne terii
kaisaa chakr chalaayaa re shyaam terii ungalii ne

jab dropadii dushṭon ne gherii
kaisaa chir baḍhaayaa re shyaam terii uungalii ne
kaisaa chakr chalaayaa re shyaam terii ungalii ne

jahar kaa pyaalaa raaṇaajii ne bhejaa
kaisaa amṛt banaayaa re shyaam terii uungalii ne
kaisaa chakr chalaayaa re shyaam terii ungalii ne

jab prahlaad pahaad se giraa thaa
kaisaa kamal khilaayaa re shyaam terii uungalii ne
kaisaa chakr chalaayaa re shyaam terii ungalii ne

jab narasii ne tumako ṭeraa
kaisaa bhaat bharaayaa re shyaam terii uungalii ne
kaisaa chakr chalaayaa re shyaam terii ungalii ne

jab arjun ne jaidraat ko maaraa
kaisaa suuraj chhipaayaa re shyaam terii ungalii ne
kaisaa chakr chalaayaa re shyaam terii ungalii ne

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परिचय

bhakti sangiit ke kshetr men, kṛshṇ bhajanon kii mantramugdh kar dene vaalii dhunen piidhiyon se dilon ko lubhaatii rahii hain. inamen se manamohak rachanaa “kaisaa chakkar chalaay re shyaam terii ungalii ne” ek mantramugdh kar dene vaalii owr aatmaa ko jhakajhor dene vaalii rachanaa ke ruup men saamane aatii hai. yah lekh is madhur bhajan ke saar par prakaash ḍaalataa hai, isake giiton ke piichhe ke gahan arthon owr isase utpann hone vaalii bhaavanaaon par prakaash ḍaalataa hai.

आध्यात्मिक गहराई को उजागर करना


“कैसा चक्कर चलाय रे श्याम तेरी उंगली ने” हिंदू पौराणिक कथाओं में प्रेम और करुणा के दिव्य अवतार भगवान कृष्ण को समर्पित एक गहन भक्ति रचना है। गीत के बोलों में गहरा आध्यात्मिक अर्थ है जो केवल संगीतमय अभिव्यक्ति से परे है, जो श्रोताओं के साथ दैवीय संबंध और भावनात्मक अनुनाद की भावना पैदा करता है।

रहस्यमय प्रेम को गले लगाना


यह गाना भक्त और भगवान कृष्ण के बीच के शाश्वत प्रेम को खूबसूरती से चित्रित करता है। वाक्यांश “कैसा चक्कर चलाय रे श्याम तेरी उंगली ने” का अनुवाद “कैसे मंत्रमुग्ध रूप से भगवान कृष्ण ने अपनी उंगली के घुमाव से मेरा मार्गदर्शन किया।” यह चित्रण कृष्ण के प्रेम की सर्वव्यापी शक्ति का प्रतीक है, जो भक्त को आराधना और भक्ति के रहस्यमय चक्र में खींचता है।

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